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उज्जैन के पवित्र मंगलनाथ मंदिर में की जाने वाली भात पूजा (चावल अर्पण पूजा) विशेष रूप से मांगलिक दोष और मंगल ग्रह के अशुभ प्रभावों को शांत करने के लिए की जाती है। यह मंदिर मंगल ग्रह की जन्मस्थली माना जाता है, इसलिए यहां की गई पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है। इस पूजा के माध्यम से कुंडली में मंगल की उग्रता को कम किया जाता है, विवाह में आ रही बाधाओं को दूर किया जाता है तथा वैवाहिक जीवन में सुख, शांति और स्थिरता लाई जाती है। इस अनुष्ठान में शिवलिंग पर पके हुए चावल (भात) और पंचामृत अर्पित किया जाता है।
भात पूजा से जुड़ी प्रमुख बातें:
- स्थान: मंगलनाथ मंदिर, उज्जैन (शिप्रा नदी के पवित्र तट पर)
- उद्देश्य: मांगलिक दोष, मंगल दोष और कुंडली में मंगल के नकारात्मक प्रभावों को शांत करना
- विधि: भगवान मंगलनाथ (शिव स्वरूप) का पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से अभिषेक कर, पके हुए चावल अर्पित किए जाते हैं
- समय: यह पूजा प्रतिदिन होती है, लेकिन विशेष रूप से सुबह 6 बजे से रात 8 बजे तक का समय शुभ माना जाता है
- लाभ: विवाह में देरी का समाधान, वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और पारिवारिक तनाव में कमी
भात पूजा की संपूर्ण प्रक्रिया:
- संकल्प: भक्त के नाम और गोत्र के साथ पूजा का संकल्प लिया जाता है
- गणेश-गौरी पूजन: सर्वप्रथम गणेश जी और गौरी माता की पूजा की जाती है
- भात अर्पण: शुद्ध एवं पके हुए चावल शिवलिंग (मंगलदेव) पर अर्पित किए जाते हैं
- मंत्र जाप: मंगल ग्रह को प्रसन्न करने हेतु विशेष मंत्रों का जाप किया जाता है, जैसे — ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः
Acharya Deependra Guruji