🔱 नवग्रह शांति पूजन | मंगल ग्रह दोष निवारण | वैदिक समाधान 🔱
नवग्रह शांति पूजन वैदिक ज्योतिष का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावशाली अनुष्ठान है। कुंडली में स्थित नवग्रह — सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु — हमारे जीवन के हर क्षेत्र को प्रभावित करते हैं। जब इनमें से कोई भी ग्रह अशुभ स्थिति में होता है, तो व्यक्ति को मानसिक, शारीरिक, आर्थिक और पारिवारिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
🔥 मंगल ग्रह दोष (मंगल दोष / मांगलिक दोष) क्यों लगता है?
कुंडली में मंगल ग्रह का 1, 4, 7, 8 या 12वें भाव में होना मंगल दोष कहलाता है। इसके कारण विवाह में देरी, वैवाहिक तनाव, क्रोध, दुर्घटना, रक्त से संबंधित रोग, भूमि-विवाद, नौकरी में बाधा और अचानक नुकसान जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
📿 नवग्रह शांति पूजन क्यों आवश्यक है?
✔️ ग्रह दोषों का शमन
✔️ मंगल दोष, कालसर्प दोष, शनि दोष से मुक्ति
✔️ विवाह, संतान, नौकरी और व्यापार में आ रही बाधाओं का निवारण
✔️ मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति
✔️ जीवन में सुख-समृद्धि और स्थिरता
नवग्रह शांति पूजन में वैदिक मंत्रों द्वारा सभी ग्रहों को प्रसन्न किया जाता है, विशेष रूप से मंगल ग्रह की शांति के लिए मंगल बीज मंत्र, हवन और विशेष विधि से पूजन कराया जाता है। यह पूजन योग्य आचार्य द्वारा सही मुहूर्त में कराना अत्यंत फलदायी होता है।
यदि आपकी कुंडली में मंगल या अन्य किसी ग्रह का दोष है, तो नवग्रह शांति पूजन अवश्य कराना चाहिए, जिससे जीवन की नकारात्मकता दूर होकर शुभ फल प्राप्त होते हैं।
🕉️ संपूर्ण वैदिक विधि से पूजन | उज्जैन में विशेष आयोजन 🕉️
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आचार्य दीपेंद्र दुबे
📍 उज्जैन